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  • Subhash Nagar Kunhadi, KOTA
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Aims & Rules

संस्था के उद्देष्य:

  1. इस संस्था का उद्देष्य सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिये प्रयास करना होगा। मानव जाति की सेवा जाति, धर्म, वर्ग विभेद भुलाकर करने का प्रयास करेगी।
  2. इस संस्था का उद्देष्य मात्र मानव सेवा व मानव का विकास करने व सामाजिक उत्थान करने का होगा तथा राजनीति से इसका कोई सम्बन्ध नहीं होगा।
  3. इस संस्था का उद्देष्य लोधा जाति के सामाजिक, आर्थिक स्तर में हर संभव सुधार करना होगा। इसके लिये अन्य जाति के मानवों के विकास का भी ध्यान रखकर कार्य करेंगी।
  4. इस संस्था का उद्देष्य सभी जाति धर्म के मानवों में प्रेम, सदभाव व भाईचारे की भावना पैदा करना होगा।
  5. लोधा समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं रूढ़ियों को समाप्त करने का प्रयास करना।
  6. लोधा समाज में ऊंच नीच के भेदभाव एवं फिरके दाराना भेदभाव को मिटा कर समानभाव की उत्पत्ति करना।
  7. लोधा समाज में देहज प्रथा को जड़ से मिटाने का प्रयास करना। बाल विवाह, बंधुआ मज़दूरी, धूम्रपान, नशाखोरी जैसी कुरीतियों के प्रति लोधा समाज के लोगों में जागृति लाना तथा इन्हें रोकने के लिए कानूनी सहायता प्राप्त करना।
  8. लोधा समाज में शिक्षा का प्रचार प्रसार कर अशिक्षा को समाप्त करना।
  9. लोधा समाज में देश प्रेम की भावना पैदा करने का प्रयास करना तथा सरकार द्वारा चलाये जा रहे समाज सुधार के कार्यों को करना व उनमें सहयोग देना।
  10. .वर्तमान युग में स्वजातिय युवक-युवतियां में बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करने में उनकी हर सम्भव मदद करना।
  11. .लोधा समाज की सामाजिक/आर्थिक/सांस्कृतिक/शारीरिक/ बौद्धिक/नैतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति करना और कराना।
  12. .लोधा जाति में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये मेधावी एवं निर्धन छात्रों को छात्रवृत्तियां देना/सरकार से दिलवाना तथा उनका मार्गदर्शन करना।
  13. .लोधा समाज में विश्वबन्धुत्व के गुण पैदा करना। आपस में मेल जोल एवं अन्य समाज बंन्धुओं से मेलजोल से रहने की भावना पैदा करना।
  14. .जहां कहीं जाति का आर्थिक/धार्मिक/सामाजिक शोषण हो रहा हो, उसके प्रतिकार के लिये स्वजातिय बंधुओं को सक्षम बनाना।
  15. .भारतीय संविधान के अन्तर्गत लोधा जाति को दी गई सुविधाओं के बारे में समाज को बताना व समाज को इन सुविधाओं का लाभ दिलाना।
  16. .समय-समय पर सम्मेलन व अधिवेशन आदि कराना व समाज के उत्थान के लिये उचित मांग सरकार के समक्ष रखना।
  17. .उद्ेष्यों की पूर्ति हेतु भारत भर में राज्य, जिला, एवं ग्राम स्तर पर समितियां गठित कर उनका संचालन करना।
  18. .महापुरुषों एवं शहीदों से संबंधित विशेष अवसरों पर कार्यक्रम आयोजित करना।
  19. .इलेक्ट्रॉॅनिक एवं प्रिंट मीडिया, कार्यशालाओं, गोष्ठियों आदि के माध्यम से लोधा समाज में व्याप्त कुरूतियों के प्रति जागृति लाना तथा इसके लिए समाज की पत्रिका (मैगज़ीन) शुरू करना।
  20. .लोधा समाज के प्रचार-प्रसार एवं उपर्युक्त उद्देश्यों के पूर्ति हेतु समान उद्देश्यों वाली संस्थाओं से सहयोग लेना एवं देना।
  21. .समाज के विकास के लिये शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करना, जिनके अन्तर्गत विद्यालय, छात्रावास तथा व्यायामशाला आदि का निर्माण, संचालन एवं सहयोग करना। इनके माध्यम से नैतिक एवं मानव मूल्यों की स्थापना मे यथासम्भव योगदान देना।
  22. सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लोधा समाज के लोगों तक पहुंचाना तथा सरकारी भागीदारी योजना के अन्तर्गत सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त करना।
  23. समाज को नशामुक्त बनाने का प्रयास करना। समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन करना। बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय की नीति अपनाकर समाज को निर्भय एवं आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना।
  24. संस्था के सदस्यों एवं आम जनता के हितों एवं अधिकारों की रक्षा के लिए सम्बन्धित विभागों से पत्र व्यवहार करना एवं आवश्यकतानुसार न्यायालय तथा संबंधित अधिकारियों से सहयोग प्राप्त करना।
  25. प्राकृतिक आपदाओ जैसे-बाढ़, सूखा, भूकम्प या तूफान आदि के समय पीड़ितों की चिकित्सा, भोजन, आवास, यातायात व अन्य सामग्री मुहैया कराना और हरसंभव सहायता प्रदान करना।
  26. समाज को मानवाधिकारों की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराना एवं भारतीय संविधान में वर्णित मानवाधिकारों का ज्ञान कराना ।
  27. विकलांगो के सेवार्थ विभिन्न योजनाएं बनाना, संचालन करना एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना।
  28. शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं अन्य सामाजिक गतिवधियां के विकास के लिए विभिन्न कार्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों को चलाना जैसे - प्रतियोगताएं, प्रदर्शनी, समारोह, सेमिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रेस कांफ्रेस, मेला, हाट आदि में खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना।
  29. महिलाओं एवं बच्चों के लिए सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं एवं अन्य संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं द्वारा सहायता के लिए आवेदन करना और सहायता प्राप्त करना।
  30. पर्यावरण सुधार हेतु वनीकरण एवं वृक्षारोपण जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को लागू करना।
  31. गरीब परिवार की कन्याओं की शादियां करवाना और उनकी आर्थिक सहायता करना।
  32. जन सामान्य के उपयोग के लिए धर्मशाला, पुस्तकालय, वाचनालय, अनाथालय, प्याऊ, गौशाला एवं वृद्धाश्रम का संचालन करना।
  33. चल-अचल सम्पत्ति खरीदने हेतु दान, चन्दा, उपहार या अन्य साधनों से धन जुटाना। प्राप्त धन केवल न्यास के उद्देश्यों को बढ़ाने हेतु लगाना और खर्चों से अधिक प्राप्त धन आयकर अधिनियम 1961 की धारा 11(5)2(15)/80जी के अंतर्गत जमा करना। इन धाराओ के तहत परिवर्तन भी किया जा सकते हैं।

नियम व अधिनियम

  1. ट्रस्ट का नाम :
    इस ट्रस्ट का नाम ‘‘अखिल भारतीय लोधा महासभा‘‘ होगा।
  2. व्याख्या :
    अ) महासभा : संविधान में जहां पर भी ‘महासभा‘ शब्द आये, वहां उसका तात्पर्य अखिल भारतीय लोधा महासभा से होगा।
    ब) लोधा : लोधा जाति के अन्तर्गत भारतवर्ष में रहने वाली लोधा, लोध, लोधे लोधी, या किसान या इनके किसी गोत्र आदि के नाम से जानी जाने वाली जातियां लोधा कहलायेंगी।
    स) सदस्य : लोधा जाति के वे सभी महिला-पुरूष जो इस संविधान के अनुसार सदस्यता हेतु आवश्यक पूर्तियां कर लेंगे इस महासभा के सदस्य होंगे।
  3. सदस्यता :
    लोधा समाज के प्रत्येक महिला या पुरूष जिसकी आयु 18 वर्ष हो चुकी हो, जो इस महासभा के नियमों-उपनियमों को पालन करते हुए इसके उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये तत्पर हों, इस महासभा के सदस्य बन सकेंगे।
    सदस्य निम्न प्रकार होंगे :
    1. साधारण सदस्य
    2. सक्रिय सदस्य
    3. संरक्षक सदस्य
    4. सम्माननीय सदस्य
  4. सदस्यता शुल्क :
    1. जो स्वजातिय महिला-पुरूष, राशि रूपये 10/- वार्षिक सदस्यता शुल्क जमा करा कर रसीद प्राप्त कर लेंगे इस महासभा के सदस्य होंगे।
    2. महासभा के सक्रिय सदस्य का सदस्यता शुल्क रूपये 100/- वार्षिक होगा।
    3. महासभा के संरक्षक सदस्य का सदस्यता शुल्क रूपये 500/- वार्षिक होगा।
    4. सम्माननी सदस्यों का कोई शुल्क नहीं होगा।
  5. शुल्क विभाजन :
    इस महासभा के कार्यां को सुचारू रूप से संचालित करने के लिये प्राप्त सदस्यता शुल्क में से, 50 प्रतिशत जिला स्तर पर, 25 प्रतिशत राज्य स्तर पर एवं 25 प्रतिशत महासभा के प्रधान कार्यालय पर जमा करवाये जावेंगे।
  6. . सदस्यता पंजिका :
    महासभा के साधारण सदस्यों का सदस्यता रजिस्टर, सक्रिय सदस्यों, संरक्षक सदस्यों तथा सम्माननीय सदस्यों का रजिस्टर अलग-अलग रखा जावेगा।
  7. संस्था की शाखाएं एवं उनके कार्यक्षेत्र :
    महासभा के कार्यां को सुचारू रूप से चलाने के लिये महासभा को स्तरों में विभाजित किया जावेगा।
    अ) राष्ट्रीय कार्यकारिणी :
    ब) राज्यों की प्रथक-प्रथक कार्यकारिणी
    स) जिलों की कार्यकारिणी
    द) ग्राम व ब्लॉक इकाईयां
  8. सदस्यता से निष्कासन :
    महासभा के सदस्य निम्न कारणों से सदस्यता से निष्कासित होंगे :
    1. लगातार दो वर्ष तक सदस्यता शुल्क जमा नहीं कराने पर, किन्तु पूरा शुल्क जमा कराने पर पुनः सदस्य बनाया जा सकता है।
    2. नियमों का पालन न करने पर।
    3. मृत्यु हो जाने पर।
    4. महासभा के उद्देश्यों व नीतियों के विरूद्ध कार्य करने पर।
  9. कार्यकारिणी का कार्यकाल :
    महासभी की कार्यकारिणी का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा तथा कार्यकारिणी गठन की तारीख से प्रारम्भ माना जावेगा।
  10. पदाधिकारियों की योग्यता :
    महासभा की कार्यकारिणी में पदाधिकारी बनने के लिये आवश्यक है की वह महासभा का विधिवत सदस्य हो।
  11. निर्वाचन :
    1. महासभा की कार्यकारिणी का चुनाव अधिवेशन के समय पर होगा। यदि किसी कारणवश अधिवेषन न हो सके तो पुरानी कार्यकारिणी का कार्यकाल अधिवेशन होने तक के लिये बढ़ाया जा सकेगा।
    2. पुरानी कार्यकारिणी को एक माह पूर्व भंग करने की घोषणा करनी होगी लेकिन पुराने सदस्य नवीन चुनाव तक विधिवत कार्य करते रहेंगे।
    3. चुनाव अधिकारी नियुक्त किया जावेगा।
    4. चुनाव में मतदान करने का अधिकार केवल नियमित सदस्य को ही होगा।
    5. साधारण सदस्य जिलों की कार्यकारिणी का चुनाव करेंगे।
    6 .सक्रीय सदस्य राज्यों की कार्यकारिणी का चुनाव करेंगे।
    7. संरक्षक सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव करेंगे।
  12. कार्यकारिणी की बैठकें :
    कार्यकारिणी की बैठक प्रत्येक स्तर पर तीन माह में एक बार आवश्यक रूप की जावेगी।
  13. पदाधिकारियों के अधिकार व कृतव्य :

    अध्यक्ष :
    1) महासभा के अध्यक्ष का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण भारतवर्ष में जहां भी लोधा जाति निवास करती है वहां तक रहेगा।
    2) प्रान्तिय व जिला कार्यकारिणी को भंग करना, नवीन चुनाव कराना, कार्यकारिणी की बैठकें बुलाना, अधिवेशन कराना आदि।
    3) अध्यक्ष को अधिकार होगा कि वह किसी भी सदस्य और पदाधिकारी को उसके खिलाफ शिकायत आने पर 2/5 बहुमत से हटा सकेगा।
    4) किसी भी निर्णय में अध्यक्ष का मत निर्णायक माना जावेगा।

    महामंत्री :
    1) महासभा के महामंत्री का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण भारतवर्ष में जहां भी लोधा जाति निवास करती है वहां तक रहेगा।
    2) वह सम्पूर्ण भारत वर्ष में पत्र व्यवहार करेगा।
    3) अध्यक्ष द्वारा प्रसारित आदेशों को राज्य तथा जिला शाखाओं तक पहुंचायेगा।
    4) वह वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा तथा सम्पूर्ण लेखा जोखा रखेगा।

    उपाध्यक्षः
    महासभा के उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष के आदेशानुसार विशेष संभाग क्षेत्र में महासभा के कार्यों को देखेंगे तथा अध्यक्ष की सहमति से उनकी अनुपस्थिति में कार्य करेंगे।

    उप महामंत्री :
    महासभा के उप महामंत्री, राष्ट्रीय महामंत्री के आदेशानुसार विशेष संभाग क्षेत्र में महासभा के कार्यों को देखेंगे तथा महामंत्री की सहमति से उनकी अनुपस्थिति में कार्य करेंगे।

    कोषाध्यक्ष :
    महासभा की सदस्यता शुल्क से प्राप्त राशि का हिसाब-किताब रखेगा। 5000/- रूपये से अधिक की राशि होने पर राष्ट्रियकृत बैंक में जमा करायेगा।

    उप कोषाध्यक्षः
    कोषाध्यक्ष की सहायता के लिये एक उप कोषाध्यक्ष होगा। कोषाध्यक्ष की लम्बे समय तक अनुपस्थित के समय कोषाध्यक्ष की सभी या किसी भी अन्य शक्ति का प्रतिनिधित्व कर सकेगा।

    प्रचार मंत्रीः
    महासभा के अधीन होने वाले कार्यक्रमों की सूचना का पत्र पत्रिकाओं आदि के माध्यम से प्रसारित करना।

    उप प्रचार मंत्री :
    प्रचार मंत्री की सहायता के लिये एक उप प्रचार मंत्री होगा।

    संगठन मंत्री :
    महासभा की सदस्यता बढ़ाने के लिये प्रयास करेगा।

    उप संगठन मंत्री :
    संगठन मंत्री की सहायता के लिये एक उप संगठन मंत्री होगा।

    कार्यकारिणी सदस्य :
    कार्यकारिण सदस्य को कार्यकारिणी की मीटिंगो में बुलाया जायेगा।
  14. सलाहकार बोर्ड :
    किसी भी मामले/मुद्दे को हल करने के लिये सलाहकार बोर्ड को किसी भी समय नियुक्त करने/नामांकन करने के लिये कार्यकारिणी अधिकृत है।
  15. ट्रस्ट की आय के स्त्रोत :
    1. सदस्यता शुल्क
    2. दान
    3. विशेष योगदान
    सभी स्त्रोंतों से प्राप्त आय का उपयोग समाज के उद्देश्य और वस्तुओं के उन्नयन और उत्थान के लिये किया जायेगा।
  16. वित्तीय वर्ष :
    समाज का वित्तीय वर्ष हर साल अप्रेल से 31 दिन तक शुरू होगा।
  17. फंड का प्रबन्धनः
    समाज की सभी आय राष्ट्रीयकृत बैंक/बैकों मे जमा की जायेगी।
  18. बैंक खातों का संचालन :
    ट्रस्ट के बैंक खातों का संचालन कोषाध्यक्ष एवं अध्यक्ष/महामंत्री के संयुक्त हस्ताक्षर द्वारा संचालित किया जायेगा।
  19. शासी निकाय की वार्षिक सूची :
    नवीन कार्यकारिणी की सूची पंजीयन कार्यालय, दिल्ली के कार्यालय में दर्ज की जायेगी।
  20. कानूनी कार्यवाही :
    सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 की धारा 6 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार महासभा के नाम पर मुकद्दमा किया जा सकता है/महासभा के नाम से मुकद्दमा किया जा सकता है।
  21. लेखा परीक्षा :
    प्रति वर्ष कार्यकारिणी द्वारा नियुक्त एक योग्य लेखा परीक्षक (सी.ए.) द्वारा ट्रस्ट के खातों की लेखा परीक्षा की जायेगी।
  22. संशोधन :
    समाज के ज्ञापन नियमों और विनियमों में नियमानुसार कोई भी संशोधन किया जा सकता है।
  23. आवश्यक प्रामाणन :
    प्रमाणित है कि यह महासभा के नियमों और विनियमों की सही प्रति है।