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अखिल भारतीय लोधा महासभा का विकास क्रम

प्राचीन काल से ही भारत वर्ष में हमारा लोधा समाज काफी संख्या में निवासरत है। उत्तर प्रदेश, मध्यमप्रदेश, राजस्थान, बंगाल, उड़ीसा, महाराष्ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़, आदि राज्यों में हमारा लोधा समाज बहुतायद से निवास कर रहा है। यदि बात राजस्थान प्रदेश की करें तो हमारे लोधा समाज में प्रारम्भ में पंचायत स्तर पर ही समाज के संगठन कार्यशील थे और लोधा समाज फिरकों में बंटा हुआ था। ऐसे समय में लोधा श्री श्याम लाल वर्मा ने राजस्थान में लोधा समाज को संगठित करने के उद्देष्य से दिनांक 09 अप्रेल 1977 को ग्राम गोविन्दपुर जिला झालावाड़ में लोधा समाज की एक सभा में उपस्थित हो कर समाज में संगठन की आवश्यकता और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोधा समाज का संगठन बनाने का प्रस्ताव सभा में रखा। इस प्रस्ताव पर उपस्थित समाज बन्धुओं ने विचारविमर्श कर कोटा डिवीजन स्तर पर लोधा समाज का संगठन बनाये जाने का निर्णय लिया।

संगठन को मूर्त रूप प्रदान करने हेतु 08 मई 1977 को सेठ मांगीलाल जी लोधा के निवास स्थान बूंदी बस स्टेण्ड, कोटा पर कोटा, बूंदी और झालावाड जिले के समाज बन्धुओं का संयुक्त अधिवेशन करने का निर्णय लिया गया।

उक्त निर्णय की पालना में अधिवेशन के आयोजन हेतु व्यापक प्रचार प्रसार किया गया और निर्धारित स्थान व दिनांक को श्री गणेशराम जी लोधा खेड़लीपुरोहित की अध्यक्षता में अधिवेशन आयोजित किया। अधिवेशन में लोधा श्री श्यामलाल वर्मा जी ने अपने उद्बोधन में कोटा डिवीजन स्तर पर लोधा समाज के संगठन बनाने का प्रस्ताव समाज बन्धुओं के समक्ष रखा। इस प्रस्ताव का तीनों जिलों से पधारे समाज बन्धुओं ने समर्थन किया तथा तन मन धन से सहयोग करने का विश्वास दिलाया। अधिवेशन में सर्वसम्मति से लोधा श्री छोटेलाल जी वर्मा झालावाड़ वालों को अध्यक्ष, लोधा श्री श्यामलाल जी वर्मा को महामंत्री, श्री गणेशराम जी लोधा खेड़लीपुरोहित को कोषाध्यक्ष तथा श्री ओमप्राकाश जी कोटा जंक्शन वालों को प्रचारमंत्री चुना गया साथ ही यह निर्णय लिया गया कि कोटा डिवीजन में लोधा समाज के सभी ग्रामों में ग्राम समितियां गठित की जावें तथा ग्राम समिति अध्यक्षों को कोटा डिवीजन लोधा सभा का कार्यकारिणी सदस्य बनाया जावे। तदोपरान्त कोटा, बूंदी व झालावाड़ जिलों के लोधा बाहुल्य ग्रामों में ग्राम समितियों का गठन कर ‘‘कोटा डिवीजन लोधा सभा’’ को मूर्त रूप प्रदान किया।

कोटा डिवीजन में लोधा समाज के संगठन को सशक्त कर सभा ने सम्पूर्ण राजस्थान के लोधा समाज को एकजुट कर संगठित करने का बीड़ा उठाया। इन्होंने राजस्थान में निवासरत समाज बन्धुओं से विचार-विमर्श कर 22 व 23 अक्टूबर सन् 1978 में राजस्थान के कोटा जिले में चर्मण्यवति नदी के तट पर खेड़ली पुरोहित में प्रान्तीय अधिवेशन कराने का निर्णय लिया और योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर एक विशाल प्रान्तीय अधिवेशन सम्पन्न करवाया।

इस अधिवेशन का उद्घाटन तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री उत्तरप्रदेश सरकार व राजस्थान के भूतपूर्व राज्यपाल माननीय कल्याण सिंह जी ने किया था। अधिवेशन के मुख्य अतिथि श्री डूंगर सिंह जी एम.एल.सी. (उ.प्र.) थे। इस दो दिवसीय अधिवेशन में राजस्थान की नवीन प्रान्तीय कार्यकारिणी का गठन ‘‘राजस्थान प्रान्तीय लोधा क्षत्रिय महासभा‘‘ के नाम से किया गया इसकी सम्बद्धता ‘‘अखिल भारतीय लोधी क्षत्रिय (राजपूत) महासभा’’ से थी उस समय इस महासभा के अध्यक्ष थे श्री डूंगर सिंह जी एम.एल.सी. (उ.प्र.) 21, ए, दारूलशफा, लखनऊ स्थाई पता 3/112, नवाबगंज कानपुर। राजस्थान की नवीन कार्यकारिणी में श्री गणेशराम जी लोधा को प्रान्तीय अध्यक्ष और श्री श्यामलाल जी को सलाहकार तथा गंगाधर जी लोधा कुन्हाड़ी वालों को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। इन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों के सहयोग से राजस्थान में लोधा समाज के संगठन को मजबूती प्रदान की। राजस्थान के विभिन्न जिलों में समाज की आमसभाओं के माध्यम से समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने नाम के साथ लोधा लिखने के लिये प्रेरित किया साथ ही लोधा समाज में शिक्षा के प्रचार प्रसार हेतु समाज के छात्र छात्राओं को प्रोत्साहित करने हेतु प्रतिभासम्मान समारोह आदि के आयोजन पर बल दिया गया और समाज में फैली कुरीतियों जैसे बाल विवाह, दहेज प्रथा, मृत्युभोज आदि की रोकथाम पर बल दिया। इसके लिये इन्होंने सामूहिक विवाह सम्मेलन के आयोजन पर बल दिया और 1979 में सर्वप्रथम बड़गांव अन्ता में श्रीमान् देवीलाल जी की अध्यक्षता में सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करवाया और निरन्तर प्रयासरत रह कर राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर सामूहिक विवाह सम्मेलन सम्पन्न करवाये जिसका अनुसरण आज भी लोधा समाज की यूवा पीड़ी करती चली आ रही है। परिणामस्वरूप हमारे समाज में दहेज प्रथा, बालविवाह व विवाहों में होने वाली फिजूलखर्ची पर काफी हद तक रोक लगी है।

अपने कार्यकाल में ये कई बार ‘‘अखिल भारतीय लोधी क्षत्रिय (राजपूत) महासभा’’ के राष्ट्रीय अधिवेशनों में भी शामिल हुए जहां इन्होंने पाया कि राष्ट्रीय अधिवेशनों में हमेशा यह प्रस्ताव पारित कराने की कोशिश की जाती थी कि समाज के सभी लोग लोधी ही लिखें। इस प्रस्ताव का विरोध इनके द्वारा समय समय पर किया जाता रहा। किन्तु इनके विरोध के उपरान्त भी लोधी महासभा ने इस प्रस्ताव को जबरन पारित कर दिया। तदोपरान्त लोधा श्री श्यामलाल जी वर्मा ने इस विषय पर गहन चिन्तन व समाज बन्धुओं से विचार विमर्श किया भारत वर्ष के कई अन्य राज्यों का दौरा किया और देखा कि वास्तव में हमारी जाति के लोग अधिकतर प्रान्तों में लोधा ही लिखते हैं और प्राचीन ग्रन्थों, शिलालेखों व ऐतिहासिक पुस्तकों का अध्ययन कर पाया कि सदियों से हमारी जाति की पहचान लोधा शब्द से ही है और यदि इस पहचान को बनाये रखना है तो हमें राष्ट्रीय स्तर पर लोधा समाज का एक सशक्त सामाजिक संगठन बनाना आवश्यक है। अतः समाज के गणमान्य व्यक्तियों से विचार विमर्श कर, इस सम्बन्ध में दिनांक 19.9.1993 को ग्राम गोविन्दपुर बावड़ी, बूंदी में समाज की आमसभा बुलाई और सम्पूर्ण भारत में रहने वाले लोधा समाज को संगठित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर पर लोधा समाज का संगठन बनाने का प्रस्ताव रखा और इसकी आवश्यकता को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया। परिणामस्वरूप आम सभा में सर्वसम्मति से अखिल भारतीय लोधा महासभा के गठन का निर्णय लिया गया और लोधा श्री श्यामलाल जी वर्मा को संयोजक नियुक्त कर इसके गठन के लिये अधिकृत किया।

लोधा श्री श्यामलाल जी ने भारतवर्ष के विभिन्न प्रान्तों में निवासरत समाज के गणमान्य प्रबुद्धजनों के परामर्श एवं सहयोग से कई वर्षाें के निरन्तर प्रयास के बाद 31 दिसम्बर 2000 को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर अखिल भारतीय लोधा महासभा की स्थापना की तथा महासभा के बैनर तले लोधा समाज को एक सूत्र में बांधने हेतु विभिन्न क्षेत्रों में जिला व प्रान्तीय अधिवेशन सम्पन्न करवाये। महासभा के पंजियन की महत्ता को ध्यान में रखते हुए 19 जुलाई 2018 को भारतीय ट्रस्ट अधिनियम के तहत महासभा को सब रजिस्ट्रार प्रथम नई दिल्ली में पंजीकृत करवाया गया।

अखिल भारतीय लोधा महासभा का प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन 11 फरवरी 2008 में शिवनी मालवा जिला होशंगाबाद, मध्यप्रदेश में महासभा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक लोधा श्री प्रेमशंकर जी वर्मा तत्कालीन विधायक और वर्तमान 2018 में भी विधायक एवं अखिल भारतीय लोधा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव के नेतृत्व में आयोजित किया गया। जिसमें मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह जी ने शिरकत की। श्री सिंह ने लोधा समाज के संगठन एवं आयोजित हो रहे सामूहिक विवाह सम्मेलन की प्रशंशा की । अधिवेशन में महासभा के संस्थापक लोधा श्री श्याम लाल वर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष बजरंगलाल जी लोधा (सत्संगाचार्य प्रबोधानन्द) व राष्ट्रीय महामंत्री मांगीलाल जी लोधा के विशिष्ठ आतिथ्य में कई राज्यों के समाज बन्धुओं ने शिरकत की। अधिवेशन में दहेज प्रथा मृत्युभोज बालविवाह नशामुक्ति को जड़ से समाप्त करने, शिक्षा के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित करने एवं सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करवाने हेतु कठोर निर्णय लिये।

अखिल भारतीय लोधा महासभा का द्वितीय राष्ट्रीय अधिवेशन 18 अप्रेल 2008 में राजस्थान के कोटा जिले के कुन्हाड़ी में आयोजित किया गया। जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री शांन्ति कुमार धारीवाल एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री प्रताप सिंह सिंघवी ने शिरकत की।

अखिल भारतीय लोधा महासभा का तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन 5 फरवरी 2012 को गॉंधी हॉल, इन्दौर, मध्यप्रदेश में आयोजित किया गया।

अखिल भारतीय लोधा महासभा द्वारा फरवरी 2018 को मनोहरथाना, झालावाड, राजस्थान में महारानी अवंतीबाई लोधा की मूर्ति का अनावरण एवं प्रतिभा सम्मान समारोह वर्तमान विधायक लोधा श्री गोविन्द जी रानीपुरिया के नेतृत्व में आयोजित किया गया। जिसमें राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल माननीय कल्याण सिंह एवं मुख्यमंत्री वसुधरा राजे ने हिस्सा लिया और समाज को सम्बोधित किया।

अखिल भारतीय लोधा महासभा झालावाड़ द्वारा 3 मार्च 2019 व 1 मार्च 2020 को युवक युवती परिचय सम्मेलन अखिल भारतीय लोधा महासभा के प्रदेश महामंत्री डॉ. के.एम. लोधा असिस्टेण्ड प्रोफेसर, मेडीकल कॉलेज, झालावाड़ के नेतृत्व में आयोजित किया गया। वर्ष 2019 में लोधा श्री गोविन्द रानीपुरिया विधायक, मनोहरथाना व लोधा श्री प्रेमशंकर वर्मा विधायक सिवनी मालवा, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बजरंगलाल लोधा (सत्संगाचार्य प्रबोधानन्द) जी उपस्थिति रहे तथा 2020 के कार्यक्रम में इन तीनों महानुभावों के साथ श्री जालम सिंह पटेल विधायक नृरसिंहपुर भी उपस्थित रहे।

अखिल भारतीय लोधा महासभा राजस्थान द्वारा 30 जून 2019 को यूआईटी ऑडीटोरियम कोटा, राजस्थान में प्रान्तीय अधिवेशन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह प्रदेश अध्यक्ष श्री दामोदर जी लोधा के नेतृत्व में आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश की सिवनी मालवा से हमारी लोधा समाज के दूसरी बार निर्वाचित हुए विधायक लोधा श्री प्रेम शंकर जी वर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बजरंगलाल जी लोधा (सत्संगाचार्य प्रबोधानन्द) व राष्ट्रीय महामंत्री श्री मांगीलाल जी लोधा उपस्थिति रहे थे।

समाज बंधुओं जनसंख्या की दृष्टि से हमें हमारे समाज पर गर्व होना चाहिये और गर्व से लोधा कहना चाहिये और अपने बच्चों के नाम के साथ उपनाम के रूप में लोधा शब्द का प्रयोग करना चाहिये। आर्थिक, सामाजिक एवं शिक्षा की दृष्टि से हमारा समाज काफी पिछड़ा हुआ है और हमारे समाज के पिछड़ेपन को हम तभी दूर कर सकेंगे जब हम सब संगठित होकर समाज के उत्थान के बारे में सोचेंगे। बिना संगठन के समाज का उत्थान सम्भव नहीं है। लोधा समाज के उत्थान के लिये समाज को संगठित करने के उद्देष्य से ही अखिल भारतीय लोधा महासभा की स्थापना की गई थी। समाज बन्धु अखिल भारतीय लोधा महासभा के बैनर तले संगठित होकर समाजोत्थान के कार्य में जुट जाएं।

आज हमारे समाज में वैचारिक परिवर्तन लाने की आवश्यकता है यदि आगे चल कर हमें हमारी सन्तानों को सुखी रखना है तो हमें विचारों में परिवर्तन लाना ही होगा। समाज में ऐसे परिवर्तन की नितान्त आवश्यकता है। हजारों वर्षों से चली आ रही कुप्रथाओं एवं रूढ़ी वादी परम्पराओं को छोड़ना ही वैचारिक परिवर्तन की बड़ी क्रान्ती होगी। हमारा अनपढ़ होना, एक दूसरे से घ्रणा करना, ईष्या रखना, ऊंच-नींच का विचार रखना, बाल विवाह करना अपने जीवन की पूर्ण कमाई शादी-विवाह में अथवा फिजूल खर्चें में व्यय करना, मुकद्दमें बाजी, मृत्युभोज, शराब, बेकार के गहने, स्वर्ग प्राप्ती के अनेक भ्रमित गलत विचारों में अपव्यय करना हमारे जीवन के साधारण से नियम बन गये है। हममें से जो लोग इस धार्मिक आडम्बर से बच गये हैं, वही उन्नति कर गये हैं। हमारे समाज में स्कूल, छात्रावास, धर्मशालाएं नाम मात्र की हैं। यह सब कार्य तभी हो सकते हैं जब आप सब अपने सामाजिक संगठन को मजबूत बनाएंगे।

अतः हमें मिल कर संगठन को मजबूत बनाना होगा। इसके जरिये सभाएं सबसे सरल और अच्छा माध्यम होगा। इसलिये समाज की जाति सभाओं में अवश्य भाग लेना चाहिये। बिना संगठन के किसी प्रकार की उन्नति सम्भव नहीं है। संगठन के बिना न तो आप शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति कर सकते हैं और ना ही जातिय कुरीतियों से छुटकारा पा सकते हैं। संगठन के बल पर ही हम दूसरें लोगों द्वारा किये जाने वाले अत्याचारों का मुकाबला कर सकते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि ‘‘संगे शक्ति कलयुगे’’ अर्थात कलियुग में संघ या संगठन में ही शक्ति होगी।

संगठन ही शक्ति है। अतः संगठन से जुड़ना हमारा परम कर्तव्य होना चाहिये। मुझे विश्वास है कि अखिल भारतीय लोधा महासभा के विधान में दिये गये उद्देष्यों की पूर्ति के लिये यदि हम सब मिल कर प्रयत्न करेंगे तो एक दिन हमारा समाज अन्य समाजों की भांति भारत में अपनी पहचान एवं स्थान बनायेगा।